भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के भरोसेमंद रॉकेट PSLV को लंबे समय बाद एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किए गए PSLV-C62 मिशन के तीसरे चरण में तकनीकी खराबी आने के कारण सैटेलाइट अपने निर्धारित रास्ते से भटक गया। इसरो ने पुष्टि की है कि इस अड़चन की वजह से उपग्रहों को उनकी अपेक्षित कक्षा (Orbit) में स्थापित नहीं किया जा सका।
कैसे फेल हुआ मिशन?
मिशन की शुरुआत बिल्कुल सटीक रही थी। सतीश धवन स्पेस सेंटर के पहले लॉन्च पैड से रॉकेट ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी थी। लेकिन सफर के तीसरे चरण (PS3) के अंत में एक ‘अनॉमली’ (अड़चन) देखी गई। इस खराबी ने रॉकेट की दिशा बदल दी, जिससे सैटेलाइट उस जगह नहीं पहुँच पाए जहाँ उन्हें होना चाहिए था।
इसरो प्रमुख ने इस घटना पर बयान देते हुए कहा, “तीसरे स्टेज में दिक्कत आई और रॉकेट की दिशा बदल गई। वर्तमान में डेटा का गहराई से विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट साझा की जाएगी।”
‘अन्वेषा’: देश का वह ‘जासूस’ जो जंगलों में छिपे दुश्मन को भी पहचान लेता
इस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी DRDO द्वारा विकसित ‘अन्वेषा’ (Anvesha) सैटेलाइट था। यह केवल एक उपग्रह नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में भारत की एक शक्तिशाली ‘आँख’ थी।
- मिशन का लक्ष्य: इसे धरती से 600 किमी ऊपर सन-सिंक्रोनस पोलर आर्बिट (SSO) में स्थापित करना था।
- क्यों था खास: यह एक उन्नत स्पाई (खुफिया) सैटेलाइट था, जो झाड़ियों, घने जंगलों या जमीन के नीचे बने बंकरों में छिपे दुश्मनों की सटीक तस्वीरें लेने में सक्षम था।
- हाइपरस्पेक्ट्रल तकनीक: अन्वेषा ‘हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग’ तकनीक पर आधारित था। यह इंसानी आँखों से न दिखने वाले प्रकाश के सैकड़ों बारीक रंगों को पहचान सकता है, जिससे किसी भी वस्तु की असलियत का पता चल जाता है।
निजी क्षेत्र और विदेशी सैटेलाइट्स को भी लगा झटका
यह मिशन इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण था। PSLV की यह 64वीं उड़ान थी और इसमें कुल 15 सैटेलाइट्स भेजे जा रहे थे।
लॉन्च किए गए सैटेलाइट्स का विवरण:
| श्रेणी | सैटेलाइट्स की संख्या | देश/संस्थान |
| भारतीय सैटेलाइट्स | 07 | इसरो, DRDO और ध्रुवा स्पेस (निजी) |
| विदेशी सैटेलाइट्स | 08 | फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके |
| कुल सैटेलाइट्स | 15 |
इस मिशन के जरिए हैदराबाद की प्राइवेट कंपनी ध्रुवा स्पेस अपने 7 सैटेलाइट्स भेज रही थी। भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए यह एक बड़ा मौका था, क्योंकि पहली बार किसी निजी कंपनी की PSLV मिशन में इतनी बड़ी भागीदारी थी।
भरोसेमंद रहा है PSLV का इतिहास
भले ही इस बार मिशन सफल नहीं हो सका, लेकिन PSLV को दुनिया के सबसे विश्वसनीय लॉन्च व्हीकल में गिना जाता है। इसी रॉकेट ने भारत के ऐतिहासिक मिशनों जैसे चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 को सफलतापूर्वक अपनी मंजिल तक पहुँचाया है। इसरो के वैज्ञानिक अब इस विफलता के कारणों की जांच कर रहे हैं ताकि भविष्य के मिशनों में ऐसी तकनीकी खामियों को सुधारा जा सके।