बसंत पंचमी, जिसे सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है, हर साल हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार ज्ञान, बुद्धि, कला और रचनात्मकता के देवता मां सरस्वती को समर्पित है और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है।
बसंत पंचमी 2026 कब है?
इस वर्ष बसंत पंचमी 2026 23 जनवरी, शुक्रवार को पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाई जा रही है। पंचमी तिथि सुबह 02:28 बजे से शुरू होकर 24 जनवरी, शनिवार, रात 01:46 बजे तक जारी रहेगी।
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
सरस्वती पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक बताया गया है, जब देवी की आराधना करने से विद्या, बुद्धि और कला के विकास की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
बसंत पंचमी का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
1. ज्ञान और विद्या का उत्सव
बसंत पंचमी मुख्य रूप से देवी सरस्वती को समर्पित है, जो ज्ञान, संगीत, कला, भाषा और शिक्षा की देवी मानी जाती हैं। इस दिन देवी की पूजा करने से बुद्धि में वृद्धि, अध्ययन में सफलता और रचनात्मक सोच प्राप्त होती है।
2. ऋतु परिवर्तन का प्रतीक
बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। प्रकृति में सर्दी कम होकर नई ऊर्जा और जीवन का संचार होता है। पीले रंग के सरसों के फूल, उजली धूप और अच्छा मौसम बसंत पंचमी को विशेष बनाते हैं।
3. पीला रंग और परंपरा
पीला रंग बसंत पंचमी का मुख्य प्रतीक है क्योंकि यह ऊर्जा, उज्ज्वलता, खुशी और सकारात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है। लोग पीले कपड़े पहनते हैं, पीले फूल अर्पित करते हैं और पीले रंग के व्यंजन बनाकर देवी को भेंट करते हैं।

सरस्वती पूजा कैसे करें (पूजा विधि)
पूजा की तैयारी
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें, विशेष रूप से पीला या सफेद रंग।
- मंदिर या पूजा स्थल को पीले फूलों, गेंदा और चन्दन से सजाएं।
- माता सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें।
पूजा सामग्री
- देवी की तस्वीर/मूर्ति
- पीला वस्त्र और फूल
- Incense sticks (अगरबत्ती), दीपक, घी
- फल, मिठाइयाँ (जैसे केसरिया हलवा, बूंदी लड्डू)
- पुस्तकें, कलम व संगीत वाद्य सामग्री
पूजा क्रम
- देवी का नाम जप करें: ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
- फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
- दीप जलाकर आरती करें।
- अंत में प्रसाद वितरित करें।
मुख्य परंपराएँ और आयोजन
विद्यारंभ (शिक्षा की शुरुआत)
इस दिन कई परिवारों में छोटे बच्चों का विद्यारंभ (पहली बार अक्षर पढ़ना/लिखना) भी कराया जाता है, ताकि उन्हें देवी सरस्वती का आशीर्वाद मिल सके।
स्कूल और कॉलेजों में कार्यक्रम
स्कूलों, कॉलेजों और शिक्षा संस्थानों में विशेष सरस्वती पूजा कार्यक्रम, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
समाज में उत्साह और जश्न
23 जनवरी 2026 को देश भर में सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में उत्साह की लहर देखी जा रही है। कई शहरों में पूजा कार्यक्रम, सामुदायिक भोग और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहाँ श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर और फूलों से सजधज कर मां सरस्वती की आराधना कर रहे हैं।
शुभकामनाएँ
आपको और आपके परिवार को “Happy Basant Panchami & Saraswati Puja 2026”!
इस पावन दिन पर देवी सरस्वती आपका ज्ञान, शांति और सफलता से जीवन उज्जवल करे। बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।