उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) की शिकायतों को हल्के में लेना अब अधिकारियों को भारी पड़ रहा है। लखनऊ नगर निगम में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने और शासन को भ्रामक (झूठी) जानकारी भेजने के मामले में एक साथ कई बड़े अधिकारियों पर कड़ा एक्शन लिया गया है।
लापरवाही ने गिराई जिले की रैंकिंग
मुख्यमंत्री पोर्टल पर आने वाली शिकायतों के आधार पर ही जिलों की ग्रेडिंग तय होती है। लखनऊ में शिकायतों का समय पर समाधान न होने और कई मामलों में बिना काम किए ही पोर्टल पर ‘निस्तारण’ की गलत रिपोर्ट अपलोड करने की वजह से जिले की रैंकिंग में गिरावट आई है। शासन स्तर पर इस स्थिति को लेकर भारी नाराजगी जताई गई थी, जिसके बाद अब नगर निगम प्रशासन हरकत में आया है।
7 अधिकारियों को ‘कारण बताओ’ नोटिस
नगर आयुक्त के स्पष्ट निर्देशों के बाद अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले 7 जिम्मेदार अधिकारियों को चिह्नित कर उन्हें ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी कर दिया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने या तो तय समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं किया या फिर कागजी खानापूर्ति कर झूठी रिपोर्ट शासन को भेज दी।
जांच में खुली पोल: ऐसे फँसे जिम्मेदार अफसर
जांच के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं, जिनके आधार पर यह कार्रवाई की गई है:
- तथ्यहीन रिपोर्ट: शिकायतों का धरातल पर समाधान किए बिना ही उन्हें ‘सॉल्व्ड’ दिखा दिया गया।
- समय सीमा का उल्लंघन: पोर्टल पर दर्ज दर्जनों शिकायतें महीनों तक लंबित रखी गईं।
- भ्रामक सूचना: शासन को भेजी गई रिपोर्ट में काम पूरा होने का दावा किया गया, जबकि मौके पर समस्या वैसी की वैसी ही थी।
सुधार न होने पर निलंबन की चेतावनी
अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव ने साफ कर दिया है कि यह तो केवल शुरुआत है। जारी किए गए नोटिस में अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। यदि उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो उन्हें निलंबन (Suspension) समेत अन्य कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाइयों का सामना करना पड़ेगा।
“यह कार्रवाई व्यवस्था में सुधार की दिशा में पहला कदम है। जनशिकायतों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार नहीं हुआ, तो परिणाम और भी सख्त होंगे।” — पंकज श्रीवास्तव, अपर नगर आयुक्त
इस कार्रवाई से नगर निगम के अन्य विभागों में भी हड़कंप मच गया है। प्रशासन की इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य पोर्टल पर आने वाली आम जनता की समस्याओं का सही और पारदर्शी तरीके से समाधान सुनिश्चित करना है।