अगले कुछ ही हफ्तों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट 2026 पेश करने वाली हैं। पिछले बजट (2025) में मध्यम वर्ग के लिए 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री कर एक बड़ी राहत दी गई थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह ‘टैक्स-फ्री’ सुविधा सभी के लिए एक जैसी नहीं है?
अगर आपकी कमाई के स्रोतों में कैपिटल गेन्स (Capital Gains) शामिल है, तो आपकी 12 लाख की कुल आय पर भी सरकार टैक्स वसूल सकती है। आइए समझते हैं इस नियम के पीछे का पूरा गणित और वह बारीक शर्तें जो अक्सर टैक्सपेयर्स नजरअंदाज कर देते हैं।
बजट 2025 की वो घोषणा, जिसने बदला टैक्स का गणित
बजट 2025 में नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत कई बड़े बदलाव किए गए थे:
- 12 लाख तक जीरो टैक्स: नई व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स देय नहीं है।
- सैलरी क्लास के लिए एक्स्ट्रा फायदा: ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ, नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रभावी टैक्स-फ्री सीमा ₹12.75 लाख हो जाती है।
- कंडीशन अप्लाई: यह छूट केवल ‘सामान्य आय’ (Normal Income) पर लागू होती है।
क्या है ‘स्पेशल रेट इनकम’ का पेच?
यहीं पर सबसे बड़ा ‘कैच’ (Catch) है। इनकम टैक्स के नियमों के अनुसार, आपकी आय को दो हिस्सों में बांटा जाता है:
- नॉर्मल इनकम: इसमें सैलरी, पेंशन, घर का किराया या बिजनेस से होने वाली कमाई आती है।
- स्पेशल रेट इनकम: इसमें शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी बेचने से होने वाले शॉर्ट-टर्म (STCG) और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) शामिल होते हैं।
नियम यह है कि ₹12 लाख की टैक्स छूट का लाभ केवल नॉर्मल इनकम पर मिलने वाली ‘रिबेट’ (Rebate) के जरिए मिलता है। कैपिटल गेन्स जैसी स्पेशल इनकम पर यह रिबेट लागू नहीं होती।
न्यू टैक्स रिजीम: वर्तमान टैक्स स्लैब (2025-26)
| वार्षिक आय | टैक्स दर |
| ₹4 लाख तक | शून्य |
| ₹4 – ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 – ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 – ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 – ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 – ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
दो उदाहरणों से समझें अपना टैक्स जोखिम
स्थिति 1: जब पूरी आय सैलरी से हो (Zero Tax)
अगर आपकी सालाना सैलरी ₹12,75,000 है, तो ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद आपकी टैक्स योग्य आय ₹12,00,000 बचती है। इस पूरी रकम पर सरकार आपको रिबेट दे देती है और आपका नेट टैक्स जीरो हो जाता है।
स्थिति 2: जब आय में शेयर या म्यूचुअल फंड का मुनाफा शामिल हो (Tax Payable)
मान लीजिए आपकी सैलरी ₹9,00,000 है और आपने शेयर बेचकर ₹3,00,000 का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन कमाया है। आपकी कुल आय यहाँ भी ₹12,00,000 ही है। लेकिन:
- सैलरी वाला हिस्सा तो स्लैब के अनुसार रिबेट पा लेगा।
- लेकिन ₹3 लाख के कैपिटल गेन पर आपको स्पेशल रेट से टैक्स देना होगा।
- यही वह स्थिति है जहाँ टैक्सपेयर्स को रिटर्न भरते समय झटका लगता है।
बजट 2026 से क्या हैं उम्मीदें?
चूंकि 1 फरवरी 2026 को नया बजट पेश होने वाला है, टैक्स एक्सपर्ट्स और आम जनता को कुछ खास उम्मीदें हैं:
- नियमों का सरलीकरण: क्या सरकार कैपिटल गेन्स को भी इस 12 लाख की रिबेट सीमा में शामिल करेगी?
- स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी: महंगाई को देखते हुए सैलरी क्लास को और राहत की उम्मीद है।
- ओल्ड टैक्स रिजीम: क्या पुराने टैक्स सिस्टम में भी कोई बदलाव होगा, जो लंबे समय से स्थिर है?
निष्कर्ष: बजट 2026 से पहले अपनी आय के स्रोतों का सही विश्लेषण करना बहुत जरूरी है। यह याद रखें कि ’12 लाख टैक्स-फ्री’ का मतलब यह नहीं है कि हर तरह की कमाई पर टैक्स नहीं लगेगा।